शुक्रवार, 16 नवंबर 2012

किसानों की जमीनों को लेकर फिर टकराव

           किसानों की कीमती जमीनों पर उद्योगपतियों की नजर लग गई है जिसके चलते प्रदेश में कई स्‍थानों पर भूमि अधिग्रहण को लेकर टकराव दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। किसान खुलकर सामने आ गये हैं। सरकार बचाव में अपने तर्क दे रही है। इसके बाद भी भूमि अधिग्रहण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। 14 नवंबर को कटनी में किसान छक्‍का की पत्‍नी सुनिया बाई ने जमीन अधिग्रहण के विरोध में मिट्टी का तेल डालकर आग लगा ली जिसकी अस्‍पताल ले जाते समय मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर भूमि अधिग्रहण का विवाद गहरा दिया है। मध्‍यप्रदेश में कटनी, सिंगरौली, सीधी, बैतूल, खंडवा आदि जिलों में भूमि अधिग्रहण का विवाद चिंगारी बन रहा है। धीरे-धीरे किसान खुलकर विरोध कर हैं। किसानों का कहना है कि उनकी जमीन औने-पौने दाम पर खरीदी जा रही है और जिला प्रशासन कंपनियों के इशारों पर काम कर रहा है। असल में भूमि अधिग्रहण कानून अंग्रेजों के जमाने का 1894 का लागू है जिसमें समय-समय पर बदलाव की बात होती रही है। केंद्र सरकार इस कानून में तब्‍दीली करने के लिए पिछले दो साल से सतत प्रयास कर रही है, लेकिन अभी तक संसद में कानून पेश नहीं हो पाया है।
भूमि अधिग्रहण मध्‍यप्रदेश के लिए एक नया सिरदर्द बन गया है। राज्‍य सरकार ने कई उद्योग लाने के लिए एमओयू किये हुए हैं और अधिकतर उद्योग जमीन की चाहत रखते हैं। राज्‍य सरकार के पास इतनी जमीन नहीं है कि वह उद्योगपतियों को संतुष्‍ट कर सकें। ऐसी स्थिति में उद्योगपतियों की नजर किसानों की जमीन पर पड़ गई है। हाल ही में नया विवाद कटनी जिले का सामने आया है जिसमें विद्युत कंपनी वेलस्‍पन अपना पॉवर प्‍लांट 1900 मेगावाट क्षमता का स्‍थापित करना चाहती है इसके लिए कंपनी को 1600 एकड़ जमीन की आवश्‍यकता है। कंपनी ने करीब 250 एकड़ जमीन सीधे किसानों से खरीद ली है और शासन ने कंपनी को 450 एकड़ जमीन दे दी है अब कंपनी को 250 एकड़ जमीन और चाहिए, जो कि अधिग्रहण से ही हासिल की जा सकती है। इसके चलते कटनी के जिला मुख्‍यालय से 55 किमी दूर विकासखंड बरही के आसपास के गांव में विवाद गहरा गया है। इसके चलते एक महिला ने आत्‍मदाह कर लिया है जिस पर तीन दिनों तक गांव के लोग लाश को लेकर आंदोलन करते रहे और अंतत: 15 नवंबर को पुलिस के साये में महिला की अंत्‍योष्टि की गई। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने भी घटना स्‍थल पर पहुंचकर गांव वालों से सीधी बातचीत की है और प्रशासन को खरी-खोटी सुनाई है। निश्चित रूप से मप्र में जमीन को लेकर विवाद दिनोंदिन गहराता जा रहा है, जो कि कंपनी के साथ-साथ अन्‍य जिलों में भी फैलता जायेगा, ऐसी आशंका लगातार प्रकट की जा रही है। मध्‍यप्रदेश का किसान पिछले आठ सालों से किसी न किसी समस्‍या से जूझ रहा है अब उसके सामने जमीन छिनने का एक बड़ा संकट सामने आ गया है। 
                                    ''जय हो मप्र की''


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