वर्षों बाद मध्यप्रदेश की राजधानी बारिश के पानी से तरबतर हो गई है। लोगों को एक बार फिर वर्ष 2006 की बारिश याद आ गई। इस बारिश ने शहर को बाढ़ के दर्शन करा दिये थे। अब वर्ष 2012 में अगस्त महीने में हुई बारिश ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। हर तरफ पानी ही पानी दिख रहा है। मौसम खुशनुमा हो गया है, भोपाल की झील में पानी लबालब भर गया है। बड़े तालाब का जल स्तर 1666.10 फीट हो गया है। भदभदा का गेट खुलने के लिए मात्र 70 फीट पानी की दरकार है। राजधानी के हर वाशिंदे को भदभदा के गेट खुलने का इंतजार है, क्योंकि ऐसा मनोरम दृश्य बार-बार देखने को नहीं मिलता है। इससे पहले वर्ष 2006 में भदभदा के गेट खुल चुके हैं। 20 अगस्त को एक दिन में 2 इंज बारिश राजधानी में हुई है। बारिश से राजधानी पूरी तरह से प्रभावित हो गई है। ईद का माहौल भी पानी ने बिगाड़ा था, लेकिन फिर भी लोगों ने दिल खोलकर ईद मनाई। राजधानी में सबसे ज्यादा हालात निचली बस्तियों के बिगड़ गये हैं।
कई बस्तियां जलमग्न हो गई हैं। सड़कों पर 2 से 3 फीट पानी भर गया है। कई घरों में पानी घुस गया है, रास्ते जाम हो गये हैं, अंधरे ने दस्तक दे दी है। पानी के ओवर फ्लो ने पूरी व्यवस्था तहस-नहस कर दी है। प्रशासन की भूमिका एक बार फिर कटघरे में है। इससे साफ जाहिर हो गया है कि बारिश से पहले प्रशासन अपनी तैयारियां करने में नाकाम साबित हुआ है। मौसम विभाग ने फिर आशंका जाहिर की है कि बारिश अभी और होगी, जबकि अब राजधानी के वाशिंदे बारिश से राहत पाना चाहते हैं।
ईद की बधाईयां देते मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और फिल्म कलाकर रजामुराद |
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