मंगलवार, 11 जून 2013

प्रदेश की संपदा पर किसका कब्‍जा

        बार बार प्रदेश की प्राकतिक संपदा पर माफिया की नजर पडने की आशंका एवं कुशंका प्रकट की जा रही है इसके बाद भी न तो सरकार जागी और न ही नौकरशाही पर फर्क पडा है जिसका परिणाम यह रहा है कि जंगल, खनिज सहित आदि संपदा के दोहन पर ऐसी निगाहें गढ गई है कि अब तो माफिया को कोई रोकने जाता है तो फिर उन पर हमले होने लगते है, जंगल और खनिज विभाग के अधिकारियों पर बार बार हमलों की घटनाएं हो रही है इन्‍हें रोकने पर कभी आधिकारिक स्‍तर पर विचार तक नहीं हुआ है और न ही इस बात पर चिंतन मनन किया गया है कि आखिरकार इस संपदा को कैसे बचाया जाए, मप्र में प्राकतिक संपदा का अपार भंडार है पर उसका प्रदेश हित में उपयोग कम ही हो रहा है बल्कि माफिया ज्‍यादा उपयोग कर रहा है, खनिज विभाग को लेकर कैग जो रिपोर्ट जारी की है वह चौकाने वाली है, इस रिपोर्ट में कहा गया है कि खनिज महकमे की लापरवाही के चलते शासन को ढाई हजार करोड का नुकसान खजाने को हुआ है, विभाग को कुल नुकसान 2627 करोड हुआ है जबकि विभाग ने वसूली 277 की है यानि विभाग को नुकसान 2350 करोड का हुआ है, ऐसा नहीं है कि विभाग को खनिज से चपत पहली बार लग रही है इससे पहले के वर्षो में भी यह चपत लगती रही है, इसके साथ ही जंगल की अवैध कटाई का दौर भी थमा नहीं है इस पर तो माफिया की ऐसी निगाह पडी है कि वह पलटकर देखना ही नहीं चाहता है, माफिया के पैर जगल और खनिज पर तेजी से फैल रहे है इन्‍हें रोकने पर कोई विचार किसी भी स्‍तर पर नहीं हो रहा है, शायद यह स्थितियां बनती और बिगडती रहे और हमारी संपदा दूसरों के हाथों में लुटती रहे ।
                                               जय हो मप्र की

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

EXCILENT BLOG