प्रदेश को भगमामय करने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य को उत्कृष्ट बनाने की जो ललक दिखाई है वह अपने आप में भविष्य में मील का पत्थर साबित होगी। चौहान की मंशा है कि मप्र न सिर्फ देश का उत्तम और बेहतर प्रदेश बने, ताकि मप्र को स्वर्णिम राज्य की अवधारणा में उतारा जा सके। धीरे-धीरे प्रदेश के विकास की अवधारणा समय के अनुसार बदल रही है और विकास की गति का पहिया तेजी से दौड़ा भी है। कभी-कभी तेज गति से दौड़ता पहिया भ्रष्टाचारियों की भेट चढ़ जाता है जिसके फलस्वरूप विकास का जो सपना मुख्यमंत्री देख रहे हैं उसमें कहीं न कही दाग लग जाते हैं, लेकिन अब मुख्यमंत्री चौहान ने साफ तौर पर 16 दिसंबर को आईएएस अधिकारियों की पहली बैठक में निर्देश दे दिये हैं कि उनका प्रदेश में कोई रिश्तेदार नहीं है और न ही कोई निकटवर्ती है। इसलिए अधिकारी जो भी काम करना चाहे खुलकर करे और प्रदेश को विकास के नये आयाम पर ले जाये।
मुख्यमंत्री का सपना और उसकी संभावनाएं :
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सपनों के सौदागर हैं। वे न सिर्फ सपने देखते हैं, बल्कि उन्हें साकार करने के लिए ताकत के साथ मैदान में जुटे रहते हैं। 14 दिसंबर को शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री चौहान ने अपने पहले भाषण में यह कहकर लोगों का दिल जीत लिया है कि उनकी हर सांस जनता के लिए हैं। न वे कोई राजा है और न ही शासक, बल्कि जनता के सेवक हैं। वे तो यह भी कहते हैं कि यह सरकार मेरी नहीं, बल्कि जनता की है। देखिए उनका इरादा कितना साफ है कि वे आने वाले पांच सालों में मप्र को देश का अग्रणी राज्य बनाने का संकल्प ले चुके हैं। उनकी इच्छा है कि इन पांच सालों में आम आदमी की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाया जाये, ताकि आम आदमी भी एक बेहतर जिंदगी जी सके। इन सपनों को साकार करने के लिए चौहान ने अधिकारियों को 100 दिन की कार्ययोजना बनाने का फरमान दे दिया है। वे चाहते हैं कि 100 दिन के बाद एक साल, दो साल, तीन साल, चार साल और पांच साल की अलग-अलग कार्य योजना बनाई जाये। इस कार्ययोजना के तहत कार्य हो, ताकि प्रदेश विकास की नई मंजिल छू सके। चौहान का सपना है कि प्रदेश विकसित राज्य बने। यहां पर बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो, रोजगार के नये रास्ते खुले, युवा पीढ़ी उद्योगपति बने और वे खुद लोगों को रोजगार दे, उद्योगों का जाल फैलाया जाये, गांव-गांव को सड़कों से जोड़ा जाये, यही वजह है कि मुख्यमंत्री ने शपथ लेने के बाद गांव और खेत को सड़क से जोड़ने की योजना का एलान कर दिया है। निश्चित रूप से यह योजना एक जनवरी से लागू की जायेगी। मप्र में उद्योग धंधो की आधारशिला बनाकर विकसित उद्योगों की श्रेणी में लाने का कार्य पांच साल में किया जाना है। चौहान का उद्योगपतियों से यह भी कहना हैकि क्षेत्र में लगने वाले उद्योगों में क्षेत्र के लोगों को 50 प्रतिशत रोजगार दिया जाये। इस बार चौहान का इरादा है कि लघु और कुटीर उद्योगों का प्रदेश में जाल फैलाया जाये। निश्चित रूप से प्रदेश में कई ऐसे छोटे उद्योग हैं जिन्हें अगर ठीक ढंग से आगे बढ़ाया जाये, तो उनसे न सिर्फ मप्र का नाम रोशन होगा, बल्कि आय का स्रोत भी विकसित होगा। मसलन लकड़ी के खिलौने, जरी के बटुए, सुपारी काटने वाला सरोता, रूई का व्यावसायिक उपयोग, बांस के वर्तन, मिट्टी के खिलौने,चमड़े के जूते एवं अन्य सामान, मिट्टी के वर्तन,घर की साज-सज्जा के सामान सहित आदि उद्योगों को विकसित किया जा सकता है। फिलहाल मप्र में ऐसे छोटे उद्योग अपने सीमित संसाधन में जैसे-तैसे पटरी पर चल रहे हैं। इन उद्योगों के विकास के लिए राज्य सरकार को नये सिरे से विचार करना चाहिए। यही वजह है कि राज्य सरकार ने उद्योगों के विस्तार के लिए व्यापार मंडल का गठन कर दिया है, जो कि रिपोर्ट देगा कि किस दिशा में प्रदेश को उद्योग स्थापित करना चाहिए। निश्चित रूप से मुख्यमंत्री चौहान ने मप्र को स्वर्णिम राज्य बनाने की दिशा में एक कदम आगे तो बढ़ाया है, लेकिन इस राह में उन्हें नौकरशाही कितना संबल देती है यह तो वक्त ही बतायेगा, लेकिन चौहान प्रदेश को नई राह पर ले जाने के लिए अलख तो जगा ही चुके हैं।
''जय हो मप्र की''
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